बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समुझत सरिस नाम अरु नामी। प्रीति परसपर प्रभु अनुगामी।।
मूल पाठ
समुझत सरिस नाम अरु नामी। प्रीति परसपर प्रभु अनुगामी।।
नाम रूप दुइ ईस उपाधी। अकथ अनादि सुसामुझि साधी।।
स्रोत अभिलेख 1.21 · पुस्तक पृ. 43, 43
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमझनेमें नाम और नामी दोनों एक-से हैं, किन्तु दोनोंमें परस्पर स्वामी और सेवकके समान प्रीति है (अर्थात् नाम और नामीमें पूर्ण एकता होनेपर भी जैसे स्वामीके पीछे सेवक चलता है, उसी प्रकार नामके पीछे नामी चलते हैं। प्रभु श्रीरामजी अपने 'राम नामका ही अनुगमन करते हैं, नाम लेते ही वहाँ आ जाते हैं)। नाम और रूप दोनों ईश्वरकी उपाधि हैं; ये (भगवान्के नाम और रूप) दोनों अनिर्वचनीय हैं, अनादि हैं और सुन्दर (शुद्ध भक्तियुक्त) बुद्धिसे ही इनका [दिव्य अविनाशी] स्वरूप जाननेमें आता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 43 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 समुझत सरिस नाम अरु नामी। प्रीति परसपर प्रभु अनुगामी।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: The name and its bearer are understood as equal; there is mutual love between them, yet the Lord follows his name.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझत | समझने पर; समझे जाते हैं | when understood; are understood |
| सरिस | समान | equal |
| नाम | प्रभु का नाम | the Lord’s name |
| अरु | और | and |
| नामी | नाम धारण करने वाले प्रभु | the Lord who bears the name |
| प्रीति | प्रेम | love |
| परसपर | एक-दूसरे के प्रति | mutually; toward each other |
| प्रभु | भगवान | the Lord |
| अनुगामी | नाम के पीछे चलने वाले | following the name |
2 नाम रूप दुइ ईस उपाधी। अकथ अनादि सुसामुझि साधी।।
English explanation
Name and form are two designations of God—ineffable and beginningless; they are realized through clear understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाम | ईश्वर का नाम | God’s name |
| रूप | ईश्वर का रूप | God’s form |
| दुइ | दो | two |
| ईस | ईश्वर की | of God |
| उपाधी | पहचान कराने वाली उपाधियाँ | identifying designations |
| अकथ | कथन से परे | beyond description |
| अनादि | जिनका कोई आरंभ नहीं | without beginning |
| सुसामुझि | भलीभाँति समझकर | having understood clearly |
| साधी | साधी या अनुभूत की जाती हैं | are realized or attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 43
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 43, 43
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।