बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समिधि सेन चतुरंग सुहाई। महा महीप भए पसु आई।।
मूल पाठ
समिधि सेन चतुरंग सुहाई। महा महीप भए पसु आई।।
मै एहि परसु काटि बलि दीन्हे। समर जग्य जप कोटिन्ह कीन्हे।।
स्रोत अभिलेख 1.283 · पुस्तक पृ. 270, 270
भावार्थ
मूल पाठ के बादचतुरंगिणी सेना सुन्दर समिधाएँ (यज्ञमें जलायी जानेवाली लकडिय़ाँ) हैं। बड़े-बड़े राजा उसमें आकर बलिके पशु हुए हैं, जिनको मैंने इसी फरसेसे काटकर बलि दिया है। ऐसे करोड़ों जपयुक्त रणयज्ञ मैंने किये हैं (अर्थात् जैसे मन्त्रोच्चारणपूर्वक 'स्वाहा शब्दके साथ आहुति दी जाती है, उसी प्रकार मैंने पुकार-पुकारकर राजाओंकी बलि दी है)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 270 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 समिधि सेन चतुरंग सुहाई। महा महीप भए पसु आई।।
English explanation
The splendid fourfold army became the sacrificial fuel, and mighty kings came to be sacrificial victims.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समिधि | यज्ञ की ईंधन-लकड़ी | sacrificial fuelwood |
| सेन | सेना | army |
| चतुरंग | हाथी, रथ, घुड़सवार और पैदल सैनिकों वाली | fourfold: elephants, chariots, cavalry, and infantry |
| सुहाई | सुंदर | splendid |
| महा | बड़े-बड़े | mighty |
| महीप | राजा | kings |
| भए | बन गए | became |
| पसु | यज्ञ के बलि-पशु | sacrificial victims |
| आई | आकर | having come |
2 मै एहि परसु काटि बलि दीन्हे। समर जग्य जप कोटिन्ह कीन्हे।।
English explanation
I cut them down with this axe and offered them as sacrifices; I performed millions of battle-sacrifices and recitations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मै | मैंने | I |
| एहि | इस | this |
| परसु | फरसे से | with the battle-axe |
| काटि | काटकर | having cut down |
| बलि | बलि | sacrifice |
| दीन्हे | दी | offered |
| समर | युद्धरूपी | in the form of battle |
| जग्य | यज्ञ | sacrifices |
| जप | मंत्र-जप | sacred recitations |
| कोटिन्ह | करोड़ों | millions upon millions |
| कीन्हे | किए | performed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.283
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 270
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 270, 270
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।