बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निपटहिं द्विज करि जानहि मोही। मैं जस बिप्र सुनावउँ तोही।।
मूल पाठ
निपटहिं द्विज करि जानहि मोही। मैं जस बिप्र सुनावउँ तोही।।
चाप स्त्रुवा सर आहुति जानू। कोप मोर अति घोर कृसानु।।
स्रोत अभिलेख 1.283 · पुस्तक पृ. 270, 270
भावार्थ
मूल पाठ के बादतू मुझे निरा ब्राह्मण ही समझता है? मैं जैसा विप्र हूँ, तुझे सुनाता हूँ। धनुषको स्रुवा, बाणको आहुति और मेरे क्रोधको अत्यन्त भयङ्कर अग्नि जान॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 270 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निपटहिं द्विज करि जानहि मोही। मैं जस बिप्र सुनावउँ तोही।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: You take me for merely a Brahmin. I shall tell you what sort of Brahmin I am.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निपटहिं | केवल ही | merely |
| द्विज | ब्राह्मण | a Brahmin |
| करि | मानकर | taking as |
| जानहि | तुम समझते हो | you consider |
| मोही | मुझे | me |
| मैं | मैं | I |
| जस | जिस प्रकार का | what sort of |
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmin |
| सुनावउँ | सुनाता हूँ | shall tell |
| तोही | तुम्हें | you |
2 चाप स्त्रुवा सर आहुति जानू। कोप मोर अति घोर कृसानु।।
English explanation
Know my bow as the sacrificial ladle and my arrows as offerings; my anger is an exceedingly fierce fire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चाप | धनुष | bow |
| स्त्रुवा | यज्ञ में आहुति देने की करछी | sacrificial ladle |
| सर | बाण | arrows |
| आहुति | यज्ञ में अर्पित सामग्री | sacrificial offerings |
| जानू | समझो | understand as |
| कोप | क्रोध | anger |
| मोर | मेरा | my |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| घोर | भयंकर | fierce |
| कृसानु | अग्नि | fire |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.283
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 270
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 270, 270
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।