बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोर प्रभाउ बिदित नहिं तोरें। बोलसि निदरि बिप्र के भोरें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमेरा प्रभाव तुझे मालूम नहीं है, इसीसे तू ब्राह्मणके धोखे मेरा निरादर करके बोल रहा है। धनुष तोड़ डाला, इससे तेरा घमंड बहुत बढ़ गया है। ऐसा अहंकार है, मानो संसारको जीतकर खड़ा है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 270 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मोर प्रभाउ बिदित नहिं तोरें। बोलसि निदरि बिप्र के भोरें।।
भंजेउ चापु दापु बड़ बाढ़ा। अहमिति मनहुँ जीति जगु ठाढ़ा।।
स्रोत अभिलेख 1.283 · पुस्तक पृ. 270, 270
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मोर प्रभाउ बिदित नहिं तोरें। बोलसि निदरि बिप्र के भोरें।।
English explanation
You do not know my might; mistaking me for merely a Brahmin, you speak disrespectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| प्रभाउ | प्रताप; सामर्थ्य | might; prowess |
| बिदित | ज्ञात | known |
| नहिं | नहीं | not |
| तोरें | तुम्हें | to you |
| बोलसि | तुम बोलते हो | you speak |
| निदरि | अनादर करके | disrespectfully |
| बिप्र | ब्राह्मण | a Brahmin |
| के | के | of |
| भोरें | भ्रम में | under the mistaken assumption |
2 भंजेउ चापु दापु बड़ बाढ़ा। अहमिति मनहुँ जीति जगु ठाढ़ा।।
English explanation
Having broken the bow, your arrogance has greatly increased; you stand in conceit as though you had conquered the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भंजेउ | तुमने तोड़ दिया | you broke |
| चापु | धनुष | the bow |
| दापु | घमंड | arrogance |
| बड़ | बहुत | greatly |
| बाढ़ा | बढ़ गया | has increased |
| अहमिति | अहंकार में | in conceit |
| मनहुँ | मानो | as though |
| जीति | जीतकर | having conquered |
| जगु | संसार | the world |
| ठाढ़ा | खड़े हो | you stand |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.283
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 270
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 270, 270
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।