बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए। सादर सतानंदु सुनि आए।।
मूल पाठ
समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए। सादर सतानंदु सुनि आए।।
बेगि कुअँरि अब आनहु जाई। चले मुदित मुनि आयसु पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.322 · पुस्तक पृ. 303, 303
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमय देखकर वसिष्ठजीने शतानन्दजीको आदरपूर्वक बुलाया। वे सुनकर आदरके साथ आये। वसिष्ठजीने कहा—अब जाकर राजकुमारीको शीघ्र ले आइये। मुनिकी आज्ञा पाकर वे प्रसन्न होकर चले॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 303 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए। सादर सतानंदु सुनि आए।।
English explanation
Seeing that the time was right, Vasistha summoned Shatananda, who came respectfully on hearing the summons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समउ | उचित समय | the appropriate time |
| बिलोकि | देखकर | having observed |
| बसिष्ठ | राम के कुलगुरु वसिष्ठ ने | Vasistha, Rama’s family preceptor |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सतानंदु | जनक के पुरोहित शतानंद | Shatananda, Janaka’s priest |
| सुनि | बुलावा सुनकर | hearing the summons |
| आए | आए | came |
2 बेगि कुअँरि अब आनहु जाई। चले मुदित मुनि आयसु पाई।।
English explanation
Vasistha said, ‘Now go and bring the princess quickly.’ Receiving the instruction, the sage Shatananda departed joyfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| कुअँरि | राजकुमारी सीता को | the princess Sita |
| अब | अब | now |
| आनहु | ले आइए | bring |
| जाई | जाकर | having gone |
| चले | चल पड़े | set out |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| मुनि | मुनि शतानंद | the sage Shatananda |
| आयसु | आज्ञा | the instruction |
| पाई | पाकर | having received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.322
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 303
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 303, 303
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।