बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समउ जानी गुर आयसु दीन्हा। पुर प्रबेसु रघुकुलमनि कीन्हा।।
मूल पाठ
समउ जानी गुर आयसु दीन्हा। पुर प्रबेसु रघुकुलमनि कीन्हा।।
सुमिरि संभु गिरजा गनराजा। मुदित महीपति सहित समाजा।।
स्रोत अभिलेख 1.347 · पुस्तक पृ. 329, 329
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[प्रवेशका] समय जानकर गुरु वसिष्ठजीने आज्ञा दी। तब रघुकुलमणि महाराज दशरथजीने शिवजी, पार्वतीजी और गणेशजीका स्मरण करके समाजसहित आनन्दित होकर नगरमें प्रवेश किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 329 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 समउ जानी गुर आयसु दीन्हा। पुर प्रबेसु रघुकुलमनि कीन्हा।।
English explanation
Recognizing the proper time, the preceptor gave permission, and Rama, the jewel of Raghu's lineage, entered the city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समउ | उचित समय | the proper time |
| जानी | जानकर | having recognized |
| गुर | गुरु ने | the preceptor |
| आयसु | आज्ञा | permission; command |
| दीन्हा | दी | gave |
| पुर | नगर में | into the city |
| प्रबेसु | प्रवेश | entry |
| रघुकुलमनि | रघुकुल के रत्न राम ने | Rama, jewel of Raghu's lineage |
| कीन्हा | किया | made |
2 सुमिरि संभु गिरजा गनराजा। मुदित महीपति सहित समाजा।।
English explanation
Remembering Shiva, Parvati, and Ganesha, the king rejoiced together with his company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| संभु | भगवान शिव | Shiva |
| गिरजा | पर्वतराज की पुत्री पार्वती | Parvati, daughter of the mountain king |
| गनराजा | गणों के अधिपति गणेश | Ganesha, lord of the divine hosts |
| मुदित | आनंदित | joyful |
| महीपति | राजा | the king |
| सहित | साथ | together with |
| समाजा | समाज; साथ आए लोगों के | his company; assembled companions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.347
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 329
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 329, 329
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