बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब सुर बिष्नु बिरंचि समेता। गए जहाँ सिव कृपानिकेता।।
मूल पाठ
सब सुर बिष्नु बिरंचि समेता। गए जहाँ सिव कृपानिकेता।।
पृथक पृथक तिन्ह कीन्हि प्रसंसा। भए प्रसन्न चंद्र अवतंसा।।
स्रोत अभिलेख 1.88 · पुस्तक पृ. 103, 103
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर वहाँसे विष्णु और ब्रह्मासहित सब देवता वहाँ गये जहाँ कृपाके धाम शिवजी थे। उन सबने शिवजीकी अलग-अलग स्तुति की, तब शशिभूषण शिवजी प्रसन्न हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 103 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब सुर बिष्नु बिरंचि समेता। गए जहाँ सिव कृपानिकेता।।
English explanation
All the gods, together with Vishnu and Brahma, went where Shiva, the abode of compassion, was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| सुर | देवता | the gods |
| बिष्नु | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| समेता | सहित | together with |
| गए | गए | went |
| जहाँ | जहाँ | where |
| सिव | भगवान शिव | Lord Shiva |
| कृपानिकेता | कृपा के धाम | the abode of compassion |
2 पृथक पृथक तिन्ह कीन्हि प्रसंसा। भए प्रसन्न चंद्र अवतंसा।।
English explanation
They each offered praise separately; Shiva, who wears the moon as an ornament, was pleased.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पृथक | अलग | separately |
| पृथक | अलग; एक-एक करके | individually |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| कीन्हि | की | offered |
| प्रसंसा | स्तुति | praise |
| भए | हुए | became |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| चंद्र | चंद्रमा | the moon |
| अवतंसा | आभूषण रूप में धारण करने वाले | wearing as an ornament |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.88
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 103
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 103, 103
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।