बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसभी पुत्र मुझे प्राणोंके समान प्यारे हैं; उनमें भी हे प्रभो! रामको तो [किसी प्रकार भी] देते नहीं बनता। कहाँ अत्यन्त डरावने और क्रूर राक्षस और कहाँ परम किशोर अवस्थाके (बिलकुल सुकुमार) मेरे सुन्दर पुत्र!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 206 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाई।।
कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा।।
स्रोत अभिलेख 1.208 · पुस्तक पृ. 206, 207
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाई।।
English explanation
All my sons are as dear to me as my life; O revered master, I cannot bring myself to give Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| सुत | पुत्र | sons |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोहि | मुझे | to me |
| प्रान | प्राणों | life |
| कि | के | of |
| नाईं | समान | like |
| राम | राम को | Rama, Dasharatha's son |
| देत | देना | giving |
| नहिं | नहीं | not |
| बनइ | मुझसे बन पड़ता | is possible for me |
| गोसाई | हे स्वामी | O revered master |
2 कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा।।
English explanation
What a contrast between those terribly fearsome, cruel demons and my handsome, very young sons!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहँ | कहाँ वे | on the one hand |
| निसिचर | राक्षस | demons; night-roamers |
| अति | अत्यंत | extremely |
| घोर | भयानक | fearsome |
| कठोरा | क्रूर | cruel |
| कहँ | कहाँ ये | on the other hand |
| सुंदर | सुंदर | handsome |
| सुत | पुत्र | sons |
| परम | अत्यंत | very |
| किसोरा | किशोर; कम उम्र के | young; adolescent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.208
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 206
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 206, 207
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।