बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब के हृदयँ मदन अभिलाषा। लता निहारि नवहिं तरु साखा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसबके हृदयमें कामकी इच्छा हो गयी। लताओं (बेलों) को देखकर वृक्षोंकी डालियाँ झुकने लगीं। नदियाँ उमड़-उमड़कर समुद्रकी ओर दौड़ीं और ताल-तलैयाँ भी आपसमें संगम करने (मिलने-जुलने) लगीं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 99 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब के हृदयँ मदन अभिलाषा। लता निहारि नवहिं तरु साखा।।
नदीं उमगि अंबुधि कहुँ धाई। संगम करहिं तलाव तलाई।।
स्रोत अभिलेख 1.85 · पुस्तक पृ. 99, 100
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सब के हृदयँ मदन अभिलाषा। लता निहारि नवहिं तरु साखा।।
English explanation
AI-generated draft meaning: Desire stirred in everyone's heart. Seeing the creepers, the branches of trees bent toward them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब | everyone |
| के | के | of |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| मदन | काम; कामदेव से प्रेरित इच्छा | erotic desire, stirred by the god of love |
| अभिलाषा | अभिलाषा | longing |
| लता | लताओं को | the creepers |
| निहारि | देखकर | on seeing |
| नवहिं | झुकती हैं | bend down |
| तरु | वृक्षों की | of trees |
| साखा | शाखाएँ | branches |
2 नदीं उमगि अंबुधि कहुँ धाई। संगम करहिं तलाव तलाई।।
English explanation
The rivers surged and rushed toward the ocean; ponds and small pools began joining together.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नदीं | नदियाँ | rivers |
| उमगि | उमड़कर | surging |
| अंबुधि | समुद्र | the ocean |
| कहुँ | की ओर | toward |
| धाई | दौड़ीं | rushed |
| संगम | मिलन | union |
| करहिं | करते हैं | make; bring about |
| तलाव | तालाब | ponds |
| तलाई | छोटी तलैयाएँ | small pools |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 99
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 99, 100
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।