बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी। को कहि सकइ सचेतन करनी।।
मूल पाठ
जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी। को कहि सकइ सचेतन करनी।।
पसु पच्छी नभ जल थलचारी। भए कामबस समय बिसारी।।
स्रोत अभिलेख 1.85 · पुस्तक पृ. 99, 100
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब जड (वृक्ष, नदी आदि) की यह दशा कही गयी, तब चेतन जीवोंकी करनी कौन कह सकता है? आकाश, जल और पृथ्वीपर विचरनेवाले सारे पशु-पक्षी [अपने संयोगका] समय भुलाकर कामके वश हो गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 99 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी। को कहि सकइ सचेतन करनी।।
English explanation
When even insentient things are described as being in such a state, who can describe the conduct of conscious beings?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ; जब | where; when |
| असि | ऐसी | such |
| दसा | दशा | condition |
| जड़न्ह | जड़ पदार्थों | insentient things |
| कै | की | of |
| बरनी | वर्णित की गई | has been described |
| को | कौन | who |
| कहि | कह | describe |
| सकइ | सकता है | can |
| सचेतन | चेतन प्राणियों का | of conscious beings |
| करनी | आचरण | conduct |
2 पसु पच्छी नभ जल थलचारी। भए कामबस समय बिसारी।।
English explanation
Animals and birds moving through sky, water, and land fell under desire's sway, forgetting the proper time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पसु | पशु | animals |
| पच्छी | पक्षी | birds |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| जल | जल में | in water |
| थलचारी | भूमि में विचरने वाले | those moving on land |
| भए | हो गए | became |
| कामबस | काम के वश में | subject to desire |
| समय | उचित समय | the proper time |
| बिसारी | भुलाकर | forgetting |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 99
- सहायक विषय
- कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
- मुद्रित पृष्ठ
- 99, 100
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।