बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सबहि मनहिं मन किए प्रनामा। देखि राम भए पूरनकामा।।
मूल पाठ
सबहि मनहिं मन किए प्रनामा। देखि राम भए पूरनकामा।।
हरषे दसरथ सुतन्ह समेता। कहि न जाइ उर आनँदु जेता।।
स्रोत अभिलेख 1.323 · पुस्तक पृ. 304, 304
भावार्थ
मूल पाठ के बादसभीने उन्हें मन-ही-मन प्रणाम किया। श्रीरामचन्द्रजीको देखकर तो सभी पूर्णकाम (कृतकृत्य) हो गये। राजा दशरथजी पुत्रोंसहित हॢषत हुए। उनके हृदयमें जितना आनन्द था, वह कहा नहीं जा सकता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 304 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सबहि मनहिं मन किए प्रनामा। देखि राम भए पूरनकामा।।
English explanation
Everyone bowed inwardly. Seeing Sita, Rama felt his desire fulfilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबहि | सबने | everyone |
| मनहिं | मन में ही | within the mind alone |
| मन | मन | mind |
| किए | किए | offered |
| प्रनामा | प्रणाम | salutations |
| देखि | देखकर | on seeing Sita |
| राम | राम | Rama, the bridegroom |
| भए | हुए | became |
| पूरनकामा | जिनकी अभिलाषा पूरी हुई | fulfilled in desire |
2 हरषे दसरथ सुतन्ह समेता। कहि न जाइ उर आनँदु जेता।।
English explanation
Dasharatha rejoiced along with his sons; the extent of the joy in their hearts cannot be expressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| दसरथ | राजा दशरथ | King Dasharatha, Rama’s father |
| सुतन्ह | पुत्रों के | his sons |
| समेता | सहित | along with |
| कहि | कहा | expressed |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| उर | हृदय में | in the heart |
| आनँदु | आनंद | joy |
| जेता | जितना | as much as there was |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.323
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 304
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 304, 304
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।