बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सबहि भाँति मोहि दीन्हि बड़ाई। निज जन जानि लीन्ह अपनाई।।
मूल पाठ
सबहि भाँति मोहि दीन्हि बड़ाई। निज जन जानि लीन्ह अपनाई।।
होहिं सहस दस सारद सेषा। करहिं कलप कोटिक भरि लेखा।।
स्रोत अभिलेख 1.342 · पुस्तक पृ. 325, 325
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपने मुझे सभी प्रकारसे बड़ाई दी और अपना जन जानकर अपना लिया। यदि दस हजार सरस्वती और शेष हों और करोड़ों कल्पोंतक गणना करते रहें॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 325 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सबहि भाँति मोहि दीन्हि बड़ाई। निज जन जानि लीन्ह अपनाई।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: You honored me in every way and accepted me as one of your own.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबहि | सभी | all |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| मोहि | मुझे | me |
| दीन्हि | दिया | gave |
| बड़ाई | सम्मान | honor |
| निज | अपना | your own |
| जन | जन; अपना सेवक | person; your devoted servant |
| जानि | समझकर | regarding as |
| लीन्ह | लिया | took |
| अपनाई | अपनाकर | as your own |
2 होहिं सहस दस सारद सेषा। करहिं कलप कोटिक भरि लेखा।।
English explanation
Even if there were ten thousand Saraswatis and Sheshas, and they continued their account for millions of cosmic ages—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होहिं | यदि हों | if there were |
| सहस | हजार | thousand |
| दस | दस | ten |
| सारद | वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech |
| सेषा | शेष, सहस्रमुख नाग | Shesha, the thousand-headed serpent |
| करहिं | करते रहें | were to keep making |
| कलप | कल्प; अत्यंत दीर्घ ब्रह्मांडीय काल | cosmic ages |
| कोटिक | करोड़ों | millions of |
| भरि | भर; पूरे समय तक | throughout |
| लेखा | वर्णन | an account |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.342
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 325
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 325
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।