बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोर भाग्य राउर गुन गाथा। कहि न सिराहिं सुनहु रघुनाथा।।
मूल पाठ
मोर भाग्य राउर गुन गाथा। कहि न सिराहिं सुनहु रघुनाथा।।
मै कछु कहउँ एक बल मोरें। तुम्ह रीझहु सनेह सुठि थोरें।।
स्रोत अभिलेख 1.342 · पुस्तक पृ. 325, 325
भावार्थ
मूल पाठ के बादतो भी हे रघुनाथजी! सुनिये, मेरे सौभाग्य और आपके गुणोंकी कथा कहकर समाप्त नहीं की जा सकती। मैं जो कुछ कह रहा हूँ, वह अपने इस एक ही बलपर कि आप अत्यन्त थोड़े प्रेमसे प्रसन्न हो जाते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 325 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मोर भाग्य राउर गुन गाथा। कहि न सिराहिं सुनहु रघुनाथा।।
English explanation
Even then they could not finish recounting my good fortune and your virtues; listen, Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| भाग्य | सौभाग्य | good fortune |
| राउर | आपके | your |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| गाथा | गाथा; वर्णन | account; narrative |
| कहि | कहकर | by recounting |
| न | नहीं | not |
| सिराहिं | समाप्त कर सकें | could finish |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| रघुनाथा | हे रघुकुल के स्वामी राम | O Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 मै कछु कहउँ एक बल मोरें। तुम्ह रीझहु सनेह सुठि थोरें।।
English explanation
I venture to say something with just one assurance: even a very little love pleases you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मै | मैं | I |
| कछु | कुछ | something |
| कहउँ | कहता हूँ | say |
| एक | एक ही | just one |
| बल | भरोसा; सहारा | assurance; support |
| मोरें | मेरे पास | that I have |
| तुम्ह | आप | you |
| रीझहु | प्रसन्न हो जाते हैं | are pleased |
| सनेह | प्रेम से | by love |
| सुठि | बहुत ही | very |
| थोरें | थोड़े से | a little |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.342
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 325
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 325
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।