बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार मागउँ कर जोरें। मनु परिहरै चरन जनि भोरें।।
मूल पाठ
बार बार मागउँ कर जोरें। मनु परिहरै चरन जनि भोरें।।
सुनि बर बचन प्रेम जनु पोषे। पूरनकाम रामु परितोषे।।
स्रोत अभिलेख 1.342 · पुस्तक पृ. 325, 325
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं बार-बार हाथ जोड़कर यह माँगता हूँ कि मेरा मन भूलकर भी आपके चरणोंको न छोड़े। जनकजीके श्रेष्ठ वचनोंको सुनकर, जो मानो प्रेमसे पुष्ट किये हुए थे, पूर्णकाम श्रीरामचन्द्रजी सन्तुष्ट हुए॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 325 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बार बार मागउँ कर जोरें। मनु परिहरै चरन जनि भोरें।।
English explanation
With folded hands I repeatedly ask that my mind never abandon your feet, even inadvertently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर-फिर | after time; repeatedly |
| मागउँ | मैं माँगता हूँ | I ask |
| कर | हाथ | hands |
| जोरें | जोड़े हुए | folded |
| मनु | मेरा मन | my mind |
| परिहरै | छोड़ दे | abandon |
| चरन | आपके चरण | your feet |
| जनि | न; कभी न | not; never |
| भोरें | भूल से भी | even inadvertently |
2 सुनि बर बचन प्रेम जनु पोषे। पूरनकाम रामु परितोषे।।
English explanation
Hearing these excellent words, which seemed to nourish love, Rama, whose desires are all fulfilled, was deeply pleased.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| बचन | वचन | words |
| प्रेम | प्रेम को | love |
| जनु | मानो | as though |
| पोषे | पोषित करते हों | nourished |
| पूरनकाम | जिनकी सभी कामनाएँ पूर्ण हैं | whose desires are all fulfilled |
| रामु | भगवान राम | Rama |
| परितोषे | अत्यंत प्रसन्न हुए | was deeply pleased |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.342
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 325
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 325
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।