बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करि बर बिनय ससुर सनमाने। पितु कौसिक बसिष्ठ सम जाने।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउन्होंने सुन्दर विनती करके पिता दशरथजी, गुरु विश्वामित्रजी और कुलगुरु वसिष्ठजीके समान जानकर ससुर जनकजीका सम्मान किया। फिर जनकजीने भरतजीसे विनती की और प्रेमके साथ मिलकर फिर उन्हें आशीर्वाद दिया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 325 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
करि बर बिनय ससुर सनमाने। पितु कौसिक बसिष्ठ सम जाने।।
बिनती बहुरि भरत सन कीन्ही। मिलि सप्रेमु पुनि आसिष दीन्ही।।
स्रोत अभिलेख 1.342 · पुस्तक पृ. 325, 325
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 करि बर बिनय ससुर सनमाने। पितु कौसिक बसिष्ठ सम जाने।।
English explanation
With gracious humility, Rama honored his father-in-law, regarding him as equal to his father, Vishvamitra, and Vasishtha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having shown |
| बर | श्रेष्ठ; सुंदर | gracious; excellent |
| बिनय | विनय; नम्र निवेदन | humility; courteous address |
| ससुर | ससुर, राजा जनक | his father-in-law, King Janaka |
| सनमाने | सम्मान किया | honored |
| पितु | पिता दशरथ | his father Dasharatha |
| कौसिक | कुशिकवंशी ऋषि विश्वामित्र | Vishvamitra, sage of Kushika’s lineage |
| बसिष्ठ | ऋषि वसिष्ठ | the sage Vasishtha |
| सम | के समान | equal to |
| जाने | माना | regarded |
2 बिनती बहुरि भरत सन कीन्ही। मिलि सप्रेमु पुनि आसिष दीन्ही।।
English explanation
Then Janaka addressed a humble request to Bharata and, meeting him affectionately, gave him his blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनती | विनती; नम्र निवेदन | a humble request |
| बहुरि | फिर | then |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| सन | से | to |
| कीन्ही | की | made |
| मिलि | मिलकर | having met |
| सप्रेमु | प्रेम सहित | affectionately |
| पुनि | फिर | then |
| आसिष | आशीर्वाद | blessing |
| दीन्ही | दिया | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.342
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 325
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 325, 325
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।