बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सप्त प्रबन्ध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना।।
मूल पाठ
सप्त प्रबन्ध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना।।
रघुपति महिमा अगुन अबाधा। बरनब सोइ बर बारि अगाधा।।
स्रोत अभिलेख 1.37 · पुस्तक पृ. 59, 60
भावार्थ
मूल पाठ के बादसात काण्ड ही इस मानस-सरोवरकी सुन्दर सात सीढिय़ाँ हैं, जिनको ज्ञानरूपी नेत्रोंसे देखते ही मन प्रसन्न हो जाता है। श्रीरघुनाथजीकी निर्गुण (प्राकृतिक गुणोंसे अतीत) और निर्बाध (एकरस) महिमाका जो वर्णन किया जायगा, वही इस सुन्दर जलकी अथाह गहराई है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 59 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सप्त प्रबन्ध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना।।
English explanation
AI draft: The seven divisions are the beautiful steps of this figurative lake; viewing them with the eyes of knowledge satisfies the mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सप्त | सात | seven |
| प्रबन्ध | कथा के विभाग या कांड | divisions of the narrative |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| सोपाना | सीढ़ियाँ | steps leading into the lake |
| ग्यान | ज्ञान के | of knowledge |
| नयन | नेत्रों से | with the eyes |
| निरखत | देखते हुए | on viewing |
| मन | मन | the mind |
| माना | संतुष्ट हुआ | is satisfied |
2 रघुपति महिमा अगुन अबाधा। बरनब सोइ बर बारि अगाधा।।
English explanation
The depiction of Rama’s glory, beyond attributes and unbounded, is this lake’s excellent, unfathomable water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| महिमा | महिमा | glory |
| अगुन | गुणों से परे | beyond attributes |
| अबाधा | बाधारहित, असीम | unrestricted, unbounded |
| बरनब | वर्णन करना | the act of describing |
| सोइ | वही | that very description |
| बर | उत्तम | excellent |
| बारि | जल | water |
| अगाधा | अथाह | unfathomably deep |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 59
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 59, 60
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।