बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सदगुर ग्यान बिराग जोग के। बिबुध बैद भव भीम रोग के।।
मूल पाठ
सदगुर ग्यान बिराग जोग के। बिबुध बैद भव भीम रोग के।।
जननि जनक सिय राम प्रेम के। बीज सकल ब्रत धरम नेम के।।
स्रोत अभिलेख 1.32 · पुस्तक पृ. 54, 55
भावार्थ
मूल पाठ के बादज्ञान, वैराग्य और योगके लिये सद्गुरु हैं और संसाररूपी भयंकर रोगका नाश करनेके लिये देवताओंके वैद्य (अश्विनीकुमार) के समान हैं। ये श्रीसीतारामजीके प्रेमके उत्पन्न करनेके लिये माता-पिता हैं और सम्पूर्ण व्रत, धर्म और नियमोंके बीज हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 54 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सदगुर ग्यान बिराग जोग के। बिबुध बैद भव भीम रोग के।।
English explanation
These virtues are true teachers of knowledge, dispassion, and yoga, and skilled physicians for the dreadful disease of worldly bondage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदगुर | सच्चे गुरु | true teachers |
| ग्यान | ज्ञान | spiritual knowledge |
| बिराग | वैराग्य | dispassion |
| जोग | योग | yoga |
| के | के | of |
| बिबुध | ज्ञानी और कुशल | learned and skilled |
| बैद | वैद्य | physicians |
| भव | संसार-बंधन | worldly bondage |
| भीम | भयंकर | dreadful |
| रोग | रोग | disease |
| के | के उपचारक | for treating |
2 जननि जनक सिय राम प्रेम के। बीज सकल ब्रत धरम नेम के।।
English explanation
They are the mother and father of love for Sita and Rama, and the seeds of all vows, righteous practices, and observances.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जननि | माता | mother |
| जनक | पिता | father |
| सिय | सीता के प्रति | for Sita |
| राम | राम के प्रति | for Rama |
| प्रेम | प्रेम | love |
| के | के | of |
| बीज | बीज या मूल | seeds or origins |
| सकल | सभी | all |
| ब्रत | व्रत | vows |
| धरम | धार्मिक आचरण | righteous practices |
| नेम | नियम | observances |
| के | के | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 54
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 54, 55
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।