बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम चरित चिंतामनि चारू। संत सुमति तिय सुभग सिंगारू।।
मूल पाठ
राम चरित चिंतामनि चारू। संत सुमति तिय सुभग सिंगारू।।
जग मंगल गुन ग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के।।
स्रोत अभिलेख 1.32 · पुस्तक पृ. 54, 55
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीका चरित्र सुन्दर चिन्तामणि है और संतोंकी सुबुद्धिरूपी स्त्रीका सुन्दर शृङ्गार है। श्रीरामचन्द्रजीके गुणसमूह जगत्का कल्याण करनेवाले और मुक्ति, धन, धर्म और परमधामके देनेवाले हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 54 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम चरित चिंतामनि चारू। संत सुमति तिय सुभग सिंगारू।।
English explanation
AI draft: Rama’s story is a beautiful wish-fulfilling jewel and a lovely adornment for the woman figured as the saints’ discerning wisdom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| चरित | चरित्र और कथा | deeds and story |
| चिंतामनि | मनोकामना पूरी करने वाली मणि | wish-fulfilling jewel |
| चारू | सुंदर | beautiful |
| संत | संतों की | of saints |
| सुमति | सद्बुद्धि | discerning wisdom |
| तिय | स्त्री | woman |
| सुभग | मनोहर | lovely |
| सिंगारू | श्रृंगार | adornment |
2 जग मंगल गुन ग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के।।
English explanation
The collections of Rama’s virtues bring welfare to the world and bestow liberation, wealth, righteousness, and an abode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग | जगत के लिए | for the world |
| मंगल | मंगलकारी | auspicious and beneficial |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| ग्राम | समूह | collections |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| के | के | belonging to |
| दानि | देने वाले | bestowers |
| मुकुति | मुक्ति | liberation |
| धन | धन | wealth |
| धरम | धर्म | righteousness |
| धाम | धाम अथवा निवास | abode or dwelling |
| के | के दाता | of these, as bestowers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 54
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 54, 55
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।