बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा। हठ न छूट छूटै बरु देहा।।
मूल पाठ
सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा। हठ न छूट छूटै बरु देहा।।
कनकउ पुनि पषान तें होई। जारेहुँ सहजु न परिहर सोई।।
स्रोत अभिलेख 1.8 · पुस्तक पृ. 95, 96
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपने यह सत्य ही कहा कि मेरा यह शरीर पर्वतसे उत्पन्न हुआ है। इसलिये हठ नहीं छूटेगा, शरीर भले ही छूट जाय। सोना भी पत्थरसे ही उत्पन्न होता है, सो वह जलाये जानेपर भी अपने स्वभाव (सुवर्णत्व) को नहीं छोड़ता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 95 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा। हठ न छूट छूटै बरु देहा।।
English explanation
You spoke truly: this body is mountain-born. My resolve will not leave me, even if I must give up my body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्य | सच | truly; the truth |
| कहेहु | आपने कहा | you have said |
| गिरिभव | पर्वत से उत्पन्न | mountain-born |
| तनु | शरीर | body |
| एहा | यह | this |
| हठ | हठ; अडिग निश्चय | obstinacy; firm resolve |
| न | नहीं | not |
| छूट | छूटता; छूटेगा | is relinquished; will leave |
| छूटै | छूट जाए | may be given up |
| बरु | भले ही | even if; rather |
| देहा | शरीर | body |
2 कनकउ पुनि पषान तें होई। जारेहुँ सहजु न परिहर सोई।।
English explanation
Gold, too, comes from stone; even when heated in fire, it does not abandon its inherent nature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनकउ | सोना भी | gold too |
| पुनि | फिर; भी | further; also |
| पषान | पत्थर; पाषाण | stone; rock |
| तें | से | from |
| होई | उत्पन्न होता है | comes into being |
| जारेहुँ | जलाने या तपाने पर भी | even when burned or heated |
| सहजु | स्वाभाविक गुण | inherent nature |
| न | नहीं | not |
| परिहर | त्यागता | abandons |
| सोई | वही सोना | that very gold |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 95
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 95, 96
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।