बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नारद बचन न मैं परिहरऊँ। बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।।
मूल पाठ
नारद बचन न मैं परिहरऊँ। बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।।
गुर कें बचन प्रतीति न जेही। सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही।।
स्रोत अभिलेख 1.8 · पुस्तक पृ. 95, 96
भावार्थ
मूल पाठ के बादअत: मैं नारदजीके वचनोंको नहीं छोड़ूँगी; चाहे घर बसे या उजड़े, इससे मैं नहीं डरती। जिसको गुरुके वचनोंमें विश्वास नहीं है, उसको सुख और सिद्धि स्वप्रमें भी सुगम नहीं होती॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 95 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नारद बचन न मैं परिहरऊँ। बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।।
English explanation
I will not abandon Narada's words. Whether my household flourishes or is ruined, I will not fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| बचन | वचन; उपदेश | words; counsel |
| न | नहीं | not |
| मैं | मैं | I |
| परिहरऊँ | त्यागूँगी | will abandon |
| बसउ | बस जाए; आबाद हो | may be established; may flourish |
| भवनु | घर; गृहस्थ जीवन | home; household |
| उजरउ | उजड़ जाए | may be ruined |
| नहिं | नहीं | not |
| डरऊँ | डरूँगी | will fear |
2 गुर कें बचन प्रतीति न जेही। सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही।।
English explanation
For one who has no faith in the guru's words, happiness and accomplishment are not readily attainable even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | guru; spiritual teacher |
| कें | के | of; the teacher's |
| बचन | वचन पर | in the words |
| प्रतीति | विश्वास | faith; trust |
| न | नहीं | not |
| जेही | जिसे | whoever; to whom |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| सुगम | सहज प्राप्त होने वाले | readily attainable |
| न | नहीं | not |
| सुख | सुख | happiness |
| सिधि | सिद्धि; सफलता | accomplishment; success |
| तेही | उसे; उसके लिए | to that person; for them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 95
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 95, 96
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।