बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सत्यकेतु कुल कोउ नहिं बाँचा। बिप्रश्राप किमि होइ असाँचा।।
मूल पाठ
सत्यकेतु कुल कोउ नहिं बाँचा। बिप्रश्राप किमि होइ असाँचा।।
रिपु जिति सब नृप नगर बसाई। निज पुर गवने जय जसु पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.175 · पुस्तक पृ. 176, 177
भावार्थ
मूल पाठ के बादसत्यकेतुके कुलमें कोई नहीं बचा। ब्राह्मणोंका शाप झूठा कैसे हो सकता था। शत्रुको जीतकर, नगरको [फिरसे] बसाकर सब राजा विजय और यश पाकर अपने-अपने नगरको चले गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 177 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सत्यकेतु कुल कोउ नहिं बाँचा। बिप्रश्राप किमि होइ असाँचा।।
English explanation
No one in Satyaketu's lineage survived. How could the Brahmin's curse prove false?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्यकेतु | राजा सत्यकेतु का | of King Satyaketu |
| कुल | वंश | lineage |
| कोउ | कोई | anyone |
| नहिं | नहीं | not |
| बाँचा | बचा | survived |
| बिप्रश्राप | ब्राह्मण का शाप | the Brahmin's curse |
| किमि | कैसे | how |
| होइ | हो सकता है | could be |
| असाँचा | असत्य | false |
2 रिपु जिति सब नृप नगर बसाई। निज पुर गवने जय जसु पाई।।
English explanation
Having defeated the enemy and resettled the city, all the kings returned to their own cities, gaining the fame of victory.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिपु | शत्रु को | the enemy |
| जिति | जीतकर | having defeated |
| सब | सभी | all |
| नृप | राजा | kings |
| नगर | नगर को | the city |
| बसाई | फिर बसाकर | having resettled |
| निज | अपने-अपने | their own |
| पुर | नगर | cities |
| गवने | लौट गए | returned |
| जय | विजय की | of victory |
| जसु | कीर्ति | fame |
| पाई | पाकर | having gained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.175
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 177
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 176, 177
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।