बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ। देखहु नारि सुभाव प्रभाऊ।।
मूल पाठ
सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ। देखहु नारि सुभाव प्रभाऊ।।
निज माया बलु हृदयँ बखानी। बोले बिहसि रामु मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 1.53 · पुस्तक पृ. 74, 74
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्त्रीस्वभावका असर तो देखो कि वहाँ (उन सर्वज्ञ भगवान्के सामने) भी सतीजी छिपाव करना चाहती हैं। अपनी मायाके बलको हृदयमें बखानकर, श्रीरामचन्द्रजी हँसकर कोमल वाणीसे बोले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 74 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ। देखहु नारि सुभाव प्रभाऊ।।
English explanation
Sati wished to conceal the truth even from him. Behold the influence of woman’s nature!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सती | सती, शिव की पत्नी | Sati, Shiva’s wife |
| कीन्ह | करना | to do |
| चह | चाहती थीं | wished |
| तहँहुँ | वहाँ भी; उनसे भी | even there; even from him |
| दुराऊ | छिपाव, बात छिपाना | concealment |
| देखहु | देखो | behold |
| नारि | नारी का | woman’s |
| सुभाव | स्वभाव | nature |
| प्रभाऊ | प्रभाव | influence |
2 निज माया बलु हृदयँ बखानी। बोले बिहसि रामु मृदु बानी।।
English explanation
Inwardly acknowledging the power of his own maya, Rama smiled and spoke gently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | his own |
| माया | माया, मोह उत्पन्न करने वाली शक्ति | maya, the power of illusion |
| बलु | बल, सामर्थ्य | power |
| हृदयँ | हृदय में, मन में | inwardly, in his heart |
| बखानी | सराहकर, बखान करके | acknowledging admiringly |
| बोले | बोले | spoke |
| बिहसि | मुस्कराकर | smiling |
| रामु | राम | Rama |
| मृदु | कोमल, मधुर | gentle |
| बानी | वाणी में | in words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 74
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 74, 74
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