बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सती कपटु जानेउ सुरस्वामी। सबदरसी सब अंतरजामी।।
मूल पाठ
सती कपटु जानेउ सुरस्वामी। सबदरसी सब अंतरजामी।।
सुमिरत जाहि मिटइ अग्याना। सोइ सरबग्य रामु भगवाना।।
स्रोत अभिलेख 1.53 · पुस्तक पृ. 74, 74
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब कुछ देखनेवाले और सबके हृदयकी जाननेवाले देवताओंके स्वामी श्रीरामचन्द्रजी सतीके कपटको जान गये; जिनके स्मरणमात्रसे अज्ञानका नाश हो जाता है, वही सर्वज्ञ भगवान् श्रीरामचन्द्रजी हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 74 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सती कपटु जानेउ सुरस्वामी। सबदरसी सब अंतरजामी।।
English explanation
Rama, Lord of the gods, recognized Sati’s deception; he sees everything and knows every heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सती | सती का | Sati’s |
| कपटु | छल, छद्मवेश | deception, disguise |
| जानेउ | जान लिया | recognized |
| सुरस्वामी | देवताओं के स्वामी राम | Rama, Lord of the gods |
| सबदरसी | सब कुछ देखने वाले | all-seeing |
| सब | सबके | of everyone |
| अंतरजामी | अंतःकरण को जानने वाले | knower of the inner heart |
2 सुमिरत जाहि मिटइ अग्याना। सोइ सरबग्य रामु भगवाना।।
English explanation
He whose remembrance dispels ignorance is the all-knowing Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरत | स्मरण करने से | by remembering |
| जाहि | जिनको | whom |
| मिटइ | मिट जाता है | is dispelled |
| अग्याना | अज्ञान | ignorance |
| सोइ | वही | that very one |
| सरबग्य | सब कुछ जानने वाले | all-knowing |
| रामु | राम | Rama |
| भगवाना | भगवान | the Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 74
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 74, 74
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