बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लछिमन दीख उमाकृत बेषा चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा।।
मूल पाठ
लछिमन दीख उमाकृत बेषा चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा।।
कहि न सकत कछु अति गंभीरा। प्रभु प्रभाउ जानत मतिधीरा।।
स्रोत अभिलेख 1.53 · पुस्तक पृ. 74, 74
भावार्थ
मूल पाठ के बादसतीजीके बनावटी वेषको देखकर लक्ष्मणजी चकित हो गये और उनके हृदयमें बड़ा भ्रम हो गया। वे बहुत गम्भीर हो गये, कुछ कह नहीं सके। धीरबुद्धि लक्ष्मण प्रभु रघुनाथजीके प्रभावको जानते थे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 74 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लछिमन दीख उमाकृत बेषा चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा।।
English explanation
AI draft: Seeing the disguise assumed by Uma, Lakshmana was astonished and deeply confused at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| दीख | देखा | saw |
| उमाकृत | उमा द्वारा धारण किया हुआ | assumed by Uma |
| बेषा | वेश; यहाँ सीता का रूप | disguise, here the appearance of Sita |
| चकित | आश्चर्यचकित | astonished |
| भए | हो गए | became |
| भ्रम | भ्रम, उलझन | confusion |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| बिसेषा | बहुत अधिक | great, intense |
2 कहि न सकत कछु अति गंभीरा। प्रभु प्रभाउ जानत मतिधीरा।।
English explanation
Deeply composed and steady-minded, Lakshmana could say nothing; he knew the Lord’s power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कह | say |
| न | नहीं | not |
| सकत | सकते थे | could |
| कछु | कुछ | anything |
| अति | अत्यंत | very |
| गंभीरा | गंभीर, संयत | composed, grave |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| प्रभाउ | प्रभाव, सामर्थ्य | power, might |
| जानत | जानते थे | knew |
| मतिधीरा | स्थिर बुद्धि वाले | steady-minded |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 74
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 74, 74
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।