बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू। पिता समेत लीन्ह निज नामू।।
मूल पाठ
जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू। पिता समेत लीन्ह निज नामू।।
कहेउ बहोरि कहाँ बृषकेतू। बिपिन अकेलि फिरहु केहि हेतू।।
स्रोत अभिलेख 1.53 · पुस्तक पृ. 74, 74
भावार्थ
मूल पाठ के बादपहले प्रभुने हाथ जोड़कर सतीको प्रणाम किया और पितासहित अपना नाम बताया। फिर कहा कि वृषकेतु शिवजी कहाँ हैं? आप यहाँ वनमें अकेली किसलिये फिर रही हैं?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 74 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू। पिता समेत लीन्ह निज नामू।।
English explanation
The Lord joined his hands in greeting and gave his own name along with his father’s.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोरि | जोड़कर | joining |
| पानि | हाथ | hands |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| कीन्ह | किया | made, offered |
| प्रनामू | प्रणाम | respectful greeting |
| पिता | पिता के नाम | his father’s name |
| समेत | सहित | along with |
| लीन्ह | लिया, बताया | uttered, stated |
| निज | अपना | his own |
| नामू | नाम | name |
2 कहेउ बहोरि कहाँ बृषकेतू। बिपिन अकेलि फिरहु केहि हेतू।।
English explanation
Then he said, ‘Where is Shiva? Why are you wandering alone in the forest?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउ | कहा | said |
| बहोरि | फिर | then, again |
| कहाँ | कहाँ हैं | where is |
| बृषकेतू | वृषभ-ध्वज वाले शिव | Shiva, whose banner bears a bull |
| बिपिन | वन में | in the forest |
| अकेलि | अकेली | alone |
| फिरहु | आप घूम रही हैं | you are wandering |
| केहि | किस | what |
| हेतू | कारण से | for reason |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 74
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 74, 74
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।