बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सतीं सो दसा संभु कै देखी। उर उपजा संदेहु बिसेषी।।
मूल पाठ
सतीं सो दसा संभु कै देखी। उर उपजा संदेहु बिसेषी।।
संकरु जगतबंद्य जगदीसा। सुर नर मुनि सब नावत सीसा।।
स्रोत अभिलेख 1.5 · पुस्तक पृ. 71, 72
भावार्थ
मूल पाठ के बादसतीजीने शङ्करजीकी वह दशा देखी तो उनके मनमें बड़ा सन्देह उत्पन्न हो गया। [वे मन-ही-मन कहने लगीं कि] शङ्करजीकी सारा जगत् वन्दना करता है, वे जगत्के ईश्वर हैं; देवता, मनुष्य, मुनि सब उनके प्रति सिर नवाते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 71 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सतीं सो दसा संभु कै देखी। उर उपजा संदेहु बिसेषी।।
English explanation
Sati observed that state of Shiva, and a strong doubt arose in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतीं | सती ने | Sati, as the observer |
| सो | वह | that |
| दसा | दशा; अवस्था | state; condition |
| संभु | शिव | Shiva |
| कै | की | of |
| देखी | देखी | observed |
| उर | सती के हृदय में | in Sati’s heart |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| संदेहु | संदेह | doubt |
| बिसेषी | बड़ा; प्रबल | strong; considerable |
2 संकरु जगतबंद्य जगदीसा। सुर नर मुनि सब नावत सीसा।।
English explanation
Sati reflects: Shankara is revered by the world and is its lord; gods, humans, and sages all bow their heads before him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संकरु | शंकर; शिव | Shankara, Shiva |
| जगतबंद्य | जगत के वंदनीय | revered by the world |
| जगदीसा | जगत के स्वामी | lord of the world |
| सुर | देवता | gods |
| नर | मनुष्य | humans |
| मुनि | मुनि; ऋषि | sages |
| सब | सभी | all |
| नावत | झुकाते हैं | bow |
| सीसा | सिर | their heads |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 71
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 71, 72
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