बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तिन्ह नृपसुतहि नह परनामा। कहि सच्चिदानंद परधमा।।
मूल पाठ
तिन्ह नृपसुतहि नह परनामा। कहि सच्चिदानंद परधमा।।
भए मगन छबि तासु बिलोकी। अजहुँ प्रीति उर रहति न रोकी।।
स्रोत अभिलेख 1.5 · पुस्तक पृ. 71, 72
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने एक राजपुत्रको सच्चिदानन्द परमधाम कहकर प्रणाम किया और उसकी शोभा देखकर वे इतने प्रेममग्न हो गये कि अबतक उनके हृदयमें प्रीति रोकनेसे भी नहीं रुकती॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 72 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तिन्ह नृपसुतहि नह परनामा। कहि सच्चिदानंद परधमा।।
English explanation
In context, Sati’s thought is that this same Shiva saluted the king’s son Rama, calling him Being-Consciousness-Bliss and the supreme abode. The supplied forms ‘नह’ and ‘परधमा’ make the wording uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन्होंने; उन्हीं शिव ने | he; that same Shiva |
| नृपसुतहि | राजपुत्र राम को | to Rama, the king’s son |
| नह | किया; यहाँ प्रणाम किया। | Did; here, paid obeisance. |
| परनामा | प्रणाम; नमन | salutation; obeisance |
| कहि | कहकर; संबोधित करके | calling; addressing as |
| सच्चिदानंद | सत्, चेतना और आनंद स्वरूप | Being, Consciousness, and Bliss |
| परधमा | परम धाम | the supreme abode |
2 भए मगन छबि तासु बिलोकी। अजहुँ प्रीति उर रहति न रोकी।।
English explanation
Seeing Rama’s beauty, Shiva became absorbed in joy; even now the love in his heart cannot be restrained.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| मगन | आनंद में मग्न | absorbed in joy |
| छबि | सुंदर छवि | beauty; lovely appearance |
| तासु | उन राम की | of that Rama |
| बिलोकी | देखकर | having beheld |
| अजहुँ | अब भी | even now |
| प्रीति | प्रेम | love |
| उर | शिव के हृदय में | in Shiva’s heart |
| रहति | रुकता है | remains checked |
| न | नहीं | not |
| रोकी | रोके जाने पर भी | even when restrained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 72
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 71, 72
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।