बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जय सच्चिदानंद जग पावन। अस कहि चलेउ मनोज नसावन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजगत्के पवित्र करनेवाले सच्चिदानन्दकी जय हो, इस प्रकार कहकर कामदेवका नाश करनेवाले श्रीशिवजी चल पड़े। कृपानिधान शिवजी बार-बार आनन्दसे पुलकित होते हुए सतीजीके साथ चले जा रहे थे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 71 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जय सच्चिदानंद जग पावन। अस कहि चलेउ मनोज नसावन।।
चले जात सिव सती समेता। पुनि पुनि पुलकत कृपानिकेता।।
स्रोत अभिलेख 1.5 · पुस्तक पृ. 71, 72
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जय सच्चिदानंद जग पावन। अस कहि चलेउ मनोज नसावन।।
English explanation
‘Glory to Being-Consciousness-Bliss, who sanctifies the world!’ Saying this, Shiva, the destroyer of the god of desire, departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जय हो | glory to |
| सच्चिदानंद | सत्, चेतना और आनंद स्वरूप राम | Rama as Being, Consciousness, and Bliss |
| जग | जगत को | the world |
| पावन | पवित्र करने वाले | one who sanctifies |
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| चलेउ | चल दिए | departed |
| मनोज | कामदेव को | the god of desire |
| नसावन | नष्ट करने वाले शिव | the destroyer, Shiva |
2 चले जात सिव सती समेता। पुनि पुनि पुलकत कृपानिकेता।।
English explanation
Shiva, the abode of compassion, continued on with Sati, repeatedly thrilled with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चले | went |
| जात | जा रहे थे | continuing onward |
| सिव | शिव | Shiva |
| सती | शिव की पत्नी सती | Sati, Shiva’s wife |
| समेता | के साथ | together with |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| पुलकत | आनंद से रोमांचित होते | thrilling with joy |
| कृपानिकेता | कृपा के धाम शिव | Shiva, the abode of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 71
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 71, 72
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।