बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संभु समय तेहि रामहि देखा। उपजा हियँ अति हरपु बिसेषा।।
मूल पाठ
संभु समय तेहि रामहि देखा। उपजा हियँ अति हरपु बिसेषा।।
भरि लोचन छबिसिंधु निहारी। कुसमय जानिन कीन्हि चिन्हारी।।
स्रोत अभिलेख 1.5 · पुस्तक पृ. 71, 72
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीशिवजीने उसी अवसरपर श्रीरामजीको देखा और उनके हृदयमें बहुत भारी आनन्द उत्पन्न हुआ। उन शोभाके समुद्र (श्रीरामचन्द्रजी) को शिवजीने नेत्र भरकर देखा, परन्तु अवसर ठीक न जानकर परिचय नहीं किया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 71 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 संभु समय तेहि रामहि देखा। उपजा हियँ अति हरपु बिसेषा।।
English explanation
AI draft: At that moment Shiva saw Rama, and exceptionally great joy arose in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभु | शिव | Shiva |
| समय | समय | moment |
| तेहि | उस | that |
| रामहि | राम को | Rama, as the object of seeing |
| देखा | देखा | saw |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| हरपु | हर्ष; आनंद | joy |
| बिसेषा | विशेष; प्रबल | exceptional; great |
2 भरि लोचन छबिसिंधु निहारी। कुसमय जानिन कीन्हि चिन्हारी।।
English explanation
Shiva gazed his fill at Rama, the ocean of beauty; judging the moment unsuitable, he did not make himself known.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरि | भरकर; जी भरकर | to the full |
| लोचन | आँखें | eyes |
| छबिसिंधु | सौंदर्य के सागर राम | Rama, the ocean of beauty |
| निहारी | निहारा | gazed upon |
| कुसमय | अनुपयुक्त समय | an unsuitable moment |
| जानिन | जानकर नहीं | recognizing this, did not |
| कीन्हि | किया | made |
| चिन्हारी | परिचय; अपनी पहचान प्रकट करना | self-identification; making himself known |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 71
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 71, 72
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।