बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सतरूपहि बिलोकि कर जोरें। देबि मागु बरु जो रुचि तोरे।।
मूल पाठ
सतरूपहि बिलोकि कर जोरें। देबि मागु बरु जो रुचि तोरे।।
जो बरु नाथ चतुर नृप मागा। सोइ कृपाल मोहि अति प्रिय लागा।।
स्रोत अभिलेख 1.15 · पुस्तक पृ. 156, 157
भावार्थ
मूल पाठ के बादशतरूपाजीको हाथ जोड़े देखकर भगवान्ने कहा—हे देवि! तुम्हारी जो इच्छा हो, सो वर माँग लो। [शतरूपाने कहा—] हे नाथ! चतुर राजाने जो वर माँगा, हे कृपालु! वह मुझे बहुत ही प्रिय लगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 156 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सतरूपहि बिलोकि कर जोरें। देबि मागु बरु जो रुचि तोरे।।
English explanation
Seeing Shatarupa with her hands joined, the Lord said, “O lady, ask for whatever boon pleases you.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतरूपहि | मनु की पत्नी शतरूपा को | Shatarupa, Manu’s wife |
| बिलोकि | देखकर | having looked at |
| कर | हाथ | hands |
| जोरें | जोड़े हुए | joined together |
| देबि | हे देवी | O lady |
| मागु | माँगो | ask for |
| बरु | वरदान | a boon |
| जो | जो | whatever |
| रुचि | पसंद हो | is pleasing |
| तोरे | तुम्हें | to you |
2 जो बरु नाथ चतुर नृप मागा। सोइ कृपाल मोहि अति प्रिय लागा।।
English explanation
Shatarupa said, “O Lord, the boon the discerning king requested is very dear to me, O compassionate one.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | which |
| बरु | वरदान | boon |
| नाथ | हे नाथ | O Lord |
| चतुर | चतुर; सूझबूझ वाले | discerning |
| नृप | राजा मनु ने | King Manu |
| मागा | माँगा | requested |
| सोइ | वही | that very one |
| कृपाल | हे कृपालु | O compassionate one |
| मोहि | मुझे | to me |
| अति | अत्यंत | very |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| लागा | लगा | seemed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 156
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 156, 157
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।