बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु परंतु सुठि होति ढिठाई। जदपि भगत हित तुम्हहि सोहाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपरन्तु हे प्रभु! बहुत ढिठाई हो रही है, यद्यपि हे भक्तोंका हित करनेवाले! वह ढिठाई भी आपको अच्छी ही लगती है। आप ब्रह्मा आदिके भी पिता (उत्पन्न करनेवाले), जगत्के स्वामी और सबके हृदयके भीतरकी जाननेवाले ब्रह्म हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 157 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रभु परंतु सुठि होति ढिठाई। जदपि भगत हित तुम्हहि सोहाई।।
तुम्ह ब्रह्मादि जनक जग स्वामी। ब्रह्म सकल उर अंतरजामी।।
स्रोत अभिलेख 1.15 · पुस्तक पृ. 156, 157
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभु परंतु सुठि होति ढिठाई। जदपि भगत हित तुम्हहि सोहाई।।
English explanation
“Yet, Lord, this is very audacious, although such boldness for devotees’ good is pleasing to you.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| परंतु | परंतु | but |
| सुठि | बहुत | very |
| होति | होती है | is; amounts to |
| ढिठाई | ढिठाई; धृष्टता | audacity; boldness |
| जदपि | यद्यपि | although |
| भगत | भक्तों के | devotees’ |
| हित | हित के लिए | for the good of |
| तुम्हहि | आपको | to you |
| सोहाई | अच्छी लगती है | is pleasing |
2 तुम्ह ब्रह्मादि जनक जग स्वामी। ब्रह्म सकल उर अंतरजामी।।
English explanation
“You are the progenitor of Brahma and the others, the Lord of the world, the Absolute, and the knower of every heart.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| ब्रह्मादि | ब्रह्मा आदि के | of Brahma and the others |
| जनक | जनक; उत्पन्न करने वाले | progenitor |
| जग | जगत के | of the world |
| स्वामी | स्वामी | Lord |
| ब्रह्म | ब्रह्म; परम तत्त्व | the Absolute |
| सकल | सबके | everyone’s |
| उर | हृदय | hearts |
| अंतरजामी | भीतर की बात जानने वाले | knower of what lies within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 157
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 156, 157
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।