बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा। गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा।।
मूल पाठ
सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा। गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा।।
अगुन अरुप अलख अज जोई। भगत प्रेम बस सगुन सो होई।।
स्रोत अभिलेख 1.116 · पुस्तक पृ. 128, 129
भावार्थ
मूल पाठ के बादसगुण और निर्गुणमें कुछ भी भेद नहीं है—मुनि, पुराण, पण्डित और वेद सभी ऐसा कहते हैं। जो निर्गुण, अरूप (निराकार), अलख (अव्यक्त) और अजन्मा है, वही भक्तोंके पे्रमवश सगुण हो जाता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 128 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा। गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा।।
English explanation
AI-draft interpretation: There is no difference between the divine with attributes and without attributes; sages, the Puranas, the wise, and the Vedas proclaim this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सगुनहि | सगुण स्वरूप में | in the divine with attributes |
| अगुनहि | निर्गुण स्वरूप में | in the divine without attributes |
| नहिं | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | any |
| भेदा | भेद | difference |
| गावहिं | गाते हैं; घोषित करते हैं | sing; proclaim |
| मुनि | मुनि | sages |
| पुरान | पुराण ग्रंथ | the Puranas |
| बुध | ज्ञानी जन | the wise |
| बेदा | वेद | the Vedas |
2 अगुन अरुप अलख अज जोई। भगत प्रेम बस सगुन सो होई।।
English explanation
The one who is without attributes, formless, beyond perception, and unborn becomes manifest with attributes through the devotee’s love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगुन | गुणों से रहित | without attributes |
| अरुप | निराकार | formless |
| अलख | इंद्रियों से अगोचर | beyond sensory perception |
| अज | अजन्मा | unborn |
| जोई | जो | the one who |
| भगत | भक्त का | the devotee’s |
| प्रेम | प्रेम | love |
| बस | वश होकर | under the sway of |
| सगुन | गुणयुक्त; साकार | manifest with attributes |
| सो | वही | that very one |
| होई | होता है | becomes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 128
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 128, 129
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।