बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सखी बचन सुनि भै परतीती। मिटा बिषादु बढ़ी अति प्रीती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसखीके वचन सुनकर रानीको [श्रीरामजीके सामथ्र्यके सम्बन्धमें] विश्वास हो गया। उनकी उदासी मिट गयी और श्रीरामजीके प्रति उनका प्रेम अत्यन्त बढ़ गया। उस समय श्रीरामचन्द्रजीको देखकर सीताजी भयभीत हृदयसे जिस-तिस [देवता] से विनती कर रही हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 249 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सखी बचन सुनि भै परतीती। मिटा बिषादु बढ़ी अति प्रीती।।
तब रामहि बिलोकि बैदेही। सभय हृदयँ बिनवति जेहि तेही।।
स्रोत अभिलेख 1.257 · पुस्तक पृ. 249, 249
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सखी बचन सुनि भै परतीती। मिटा बिषादु बढ़ी अति प्रीती।।
English explanation
Hearing her companion's words, the queen gained confidence; her sorrow vanished and her affection greatly increased.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखी | सखी के | her companion's |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| भै | हुआ | arose |
| परतीती | विश्वास | confidence |
| मिटा | मिट गया | vanished |
| बिषादु | विषाद | sorrow |
| बढ़ी | बढ़ गई | increased |
| अति | बहुत | greatly |
| प्रीती | प्रीति | affection |
2 तब रामहि बिलोकि बैदेही। सभय हृदयँ बिनवति जेहि तेही।।
English explanation
Then, looking at Rama, Sita began appealing to one deity after another with an anxious heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रामहि | राम को | at Rama |
| बिलोकि | देखकर | having looked |
| बैदेही | विदेहराज की पुत्री सीता | Sita, daughter of the king of Videha |
| सभय | भययुक्त | anxious |
| हृदयँ | हृदय से | with her heart |
| बिनवति | विनती करती हैं | appeals |
| जेहि | जिससे भी | to whichever one |
| तेही | उसी से | to that one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.257
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 249
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 249, 249
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।