बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सखि सब कौतुक देखनिहारे। जेठ कहावत हितू हमारे।।
मूल पाठ
सखि सब कौतुक देखनिहारे। जेठ कहावत हितू हमारे।।
कोउ न बुझाइ कहइ गुर पाहीं। ए बालक असि हठ भलि नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.256 · पुस्तक पृ. 248, 249
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे सखी! ये जो हमारे हितू कहलाते हैं, वे भी सब तमाशा देखनेवाले हैं। कोई भी [इनके] गुरु विश्वामित्रजीको समझाकर नहीं कहता कि ये (रामजी) बालक हैं, इनके लिये ऐसा हठ अच्छा नहीं। [जो धनुष रावण और बाण-जैसे जगद्विजयी वीरोंके हिलाये न हिल सका, उसे तोडऩेके लिये मुनि विश्वामित्रजीका रामजीको आज्ञा देना और रामजीका उसे तोडऩेके लिये चल देना रानीको हठ जान पड़ा, इसलिये वे कहने लगीं कि गुरु विश्वामित्रजीको कोई समझाता भी नहीं।]॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 248 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सखि सब कौतुक देखनिहारे। जेठ कहावत हितू हमारे।।
English explanation
Friend, everyone is merely watching the spectacle—even those who call themselves our foremost well-wishers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखि | हे सखी | O friend |
| सब | सभी | everyone |
| कौतुक | तमाशा | the spectacle |
| देखनिहारे | देखने वाले | onlookers |
| जेठ | बड़े; प्रमुख | foremost; leading |
| कहावत | कहलाते हैं | are called |
| हितू | हितैषी | well-wishers |
| हमारे | हमारे | our |
2 कोउ न बुझाइ कहइ गुर पाहीं। ए बालक असि हठ भलि नाहीं।।
English explanation
No one reasons with the sage and says, 'These are children; such insistence is not right.'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोउ | कोई | anyone |
| न | नहीं | not |
| बुझाइ | समझाकर | by reasoning with him |
| कहइ | कहता है | says |
| गुर | गुरु विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| पाहीं | के पास; से | to; in the presence of |
| ए | ये | these |
| बालक | बालक हैं | are children |
| असि | ऐसी | such |
| हठ | हठ; आग्रह | insistence |
| भलि | अच्छी | good; proper |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.256
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 248
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 248, 249
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।