बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकुची ब्याकुलता बड़ि जानी। धरि धीरजु प्रतीति उर आनी।।
मूल पाठ
सकुची ब्याकुलता बड़ि जानी। धरि धीरजु प्रतीति उर आनी।।
तन मन बचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चितु राचा।।
स्रोत अभिलेख 1.259 · पुस्तक पृ. 250, 251
भावार्थ
मूल पाठ के बादअपनी बढ़ी हुई व्याकुलता जानकर सीताजी सकुचा गयीं और धीरज धरकर हृदयमें विश्वास ले आयीं कि यदि तन, मन और वचनसे मेरा प्रण सच्चा है और श्रीरघुनाथजीके चरणकमलोंमें मेरा चित्त वास्तवमें अनुरक्त है,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 250 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सकुची ब्याकुलता बड़ि जानी। धरि धीरजु प्रतीति उर आनी।।
English explanation
Recognizing how great her agitation had become, Sita felt abashed; she steadied herself and brought confidence into her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकुची | संकुचित हुईं; लजा गईं | felt abashed |
| ब्याकुलता | व्याकुलता | agitation |
| बड़ि | बहुत बड़ी; बढ़ी हुई | great; heightened |
| जानी | जानकर | recognizing |
| धरि | धारण करके | having mustered |
| धीरजु | धैर्य | composure |
| प्रतीति | विश्वास | confidence |
| उर | हृदय में | into the heart |
| आनी | लाईं | brought |
2 तन मन बचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चितु राचा।।
English explanation
If my vow is true in body, mind, and speech, and my heart is devoted to Rama’s lotus feet—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तन | शरीर से | in body |
| मन | मन से | in mind |
| बचन | वचन से | in speech |
| मोर | मेरा | my |
| पनु | प्रण | vow |
| साचा | सच्चा | true |
| रघुपति | श्रीराम के | of Rama, lord of Raghu’s line |
| पद | चरण | feet |
| सरोज | कमल | lotuses |
| चितु | चित्त | heart; mind |
| राचा | अनुरक्त है | is devoted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.259
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 250
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 250, 251
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।