बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गिरा अलिनि मुख पंकज रोकी। प्रगट न लाज निसा अवलोकी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताजीकी वाणीरूपी भ्रमरीको उनके मुखरूपी कमलने रोक रखा है। लाजरूपी रात्रिको देखकर वह प्रकट नहीं हो रही है। नेत्रोंका जल नेत्रोंके कोने (कोये) में ही रह जाता है। जैसे बड़े भारी कंजूसका सोना कोनेमें ही गड़ा रह जाता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 250 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गिरा अलिनि मुख पंकज रोकी। प्रगट न लाज निसा अवलोकी।।
लोचन जलु रह लोचन कोना। जैसे परम कृपन कर सोना।।
स्रोत अभिलेख 1.259 · पुस्तक पृ. 250, 251
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गिरा अलिनि मुख पंकज रोकी। प्रगट न लाज निसा अवलोकी।।
English explanation
Seeing the night of modesty, the bee of speech remained confined within the lotus of her mouth and did not emerge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरा | वाणी | speech |
| अलिनि | भौंरी | female bee |
| मुख | मुख | mouth |
| पंकज | कमल | lotus |
| रोकी | रुकी रही | remained confined |
| प्रगट | प्रकट हुई | emerged |
| न | नहीं | not |
| लाज | लज्जा | modesty |
| निसा | रात | night |
| अवलोकी | देखकर | having seen |
2 लोचन जलु रह लोचन कोना। जैसे परम कृपन कर सोना।।
English explanation
Tears stayed in the corners of her eyes, like gold kept hoarded by an extreme miser.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोचन | आँखों का | of the eyes |
| जलु | जल; आँसू | water; tears |
| रह | रहा; रुका रहा | remained |
| लोचन | आँखों के | of the eyes |
| कोना | कोनों में | in the corners |
| जैसे | जैसे | just as |
| परम | अत्यंत | extremely |
| कृपन | कंजूस | miser |
| कर | का | belonging to |
| सोना | सोना | gold |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.259
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 250
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 250, 251
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।