बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए।।
मूल पाठ
सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए।।
समय जानि गुर आयसु पाई। लेन प्रसून चले दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 1.227 · पुस्तक पृ. 223, 223
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब शौचक्रिया करके वे जाकर नहाये। फिर [सन्ध्या-अग्रिहोत्रादि] नित्यकर्म समाप्त करके उन्होंने मुनिको मस्तक नवाया। [पूजाका] समय जानकर, गुरुकी आज्ञा पाकर दोनों भाई फूल लेने चले॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 223 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए।।
English explanation
After attending to all bodily cleansing, the two brothers went and bathed. Completing their daily observances, they bowed their heads to the sage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सब | all |
| सौच | शौच और शारीरिक स्वच्छता के कार्य | bodily cleansing and toilet duties |
| करि | करके | having performed |
| जाइ | जाकर | having gone |
| नहाए | नहाए | bathed |
| नित्य | नित्यकर्म | daily observances |
| निबाहि | पूरा करके | having completed |
| मुनिहि | मुनि विश्वामित्र को | to the sage Vishvamitra |
| सिर | सिर | heads |
| नाए | नवाए | bowed |
2 समय जानि गुर आयसु पाई। लेन प्रसून चले दोउ भाई।।
English explanation
Recognizing the proper time and obtaining their teacher’s permission, the two brothers set out to gather flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समय | उचित समय | the proper time |
| जानि | जानकर | recognizing |
| गुर | गुरु विश्वामित्र की | of their teacher Vishvamitra |
| आयसु | आज्ञा या अनुमति | instruction or permission |
| पाई | पाकर | having obtained |
| लेन | लेने के लिए | to gather |
| प्रसून | फूल | flowers |
| चले | चल पड़े | set out |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.227
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 223
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 223, 223
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।