बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकल सुकृत फल भूरि भोग से। जग हित निरुपधि साधु लोग से।।
मूल पाठ
सकल सुकृत फल भूरि भोग से। जग हित निरुपधि साधु लोग से।।
सेवक मन मानस मराल से। पावक गंग तंरग माल से।।
स्रोत अभिलेख 1.32 · पुस्तक पृ. 54, 55
भावार्थ
मूल पाठ के बादसम्पूर्ण पुण्योंके फल महान् भोगोंके समान हैं। जगत्का छलरहित (यथार्थ) हित करनेमें साधु- संतोंके समान हैं। सेवकोंके मनरूपी मानसरोवरके लिये हंसके समान और पवित्र करनेमें गङ्गाजीकी तरङ्गमालाओंके समान हैं॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 55 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सकल सुकृत फल भूरि भोग से। जग हित निरुपधि साधु लोग से।।
English explanation
They are like the abundant enjoyments yielded by all meritorious deeds, and like saints who selflessly benefit the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | समस्त | all |
| सुकृत | पुण्यकर्म | meritorious deeds |
| फल | फल | fruits |
| भूरि | प्रचुर | abundant |
| भोग | सुख-भोग | enjoyments |
| से | जैसे | like |
| जग | जगत का | of the world |
| हित | कल्याण | welfare |
| निरुपधि | बिना स्वार्थ या छल के | without selfish motive or deceit |
| साधु | साधु | saintly |
| लोग | जन | people |
| से | जैसे | like |
2 सेवक मन मानस मराल से। पावक गंग तंरग माल से।।
English explanation
They are like swans in the Manasa lake of devotees’ minds, and like a succession of Ganges waves in their purifying power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवक | भक्त-सेवकों के | of devotees |
| मन | मन | minds |
| मानस | मानसरोवर | Lake Manasa |
| मराल | हंस | swans |
| से | जैसे | like |
| पावक | पवित्र करने वाले | purifying |
| गंग | गंगा की | of the Ganges |
| तंरग | तरंगों की | of waves |
| माल | माला या शृंखला | garland or succession |
| से | जैसे | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 55
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 54, 55
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।