बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अभिमत दानि देवतरु बर से। सेवत सुलभ सुखद हरि हर से।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमनोवाञ्छित वस्तु देनेमें श्रेष्ठ कल्पवृक्षके समान हैं और सेवा करनेमें हरि-हरके समान सुलभ और सुख देनेवाले हैं। सुकविरूपी शरद् ऋतुके मनरूपी आकाशको सुशोभित करनेके लिये तारागणके समान और श्रीरामजीके भक्तोंके तो जीवनधन ही हैं॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 55 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अभिमत दानि देवतरु बर से। सेवत सुलभ सुखद हरि हर से।।
सुकबि सरद नभ मन उडगन से। रामभगत जन जीवन धन से।।
स्रोत अभिलेख 1.32 · पुस्तक पृ. 54, 55
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अभिमत दानि देवतरु बर से। सेवत सुलभ सुखद हरि हर से।।
English explanation
They are like excellent heavenly wish-trees in granting desires, and like Vishnu and Shiva, accessible through service and bestowing happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अभिमत | मनचाहा | what one desires |
| दानि | देने वाले | bestowers |
| देवतरु | कल्पवृक्ष | heavenly wish-tree |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| से | जैसे | like |
| सेवत | सेवा करने पर | when served |
| सुलभ | सहज प्राप्त | readily accessible |
| सुखद | सुख देने वाले | happiness-giving |
| हरि | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| हर | भगवान शिव | Lord Shiva |
| से | जैसे | like |
2 सुकबि सरद नभ मन उडगन से। रामभगत जन जीवन धन से।।
English explanation
They are like constellations in the autumn sky of good poets’ minds, and like the cherished wealth of Rama’s devotees’ lives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुकबि | अच्छे कवियों के | of good poets |
| सरद | शरद ऋतु का | autumnal |
| नभ | आकाश | sky |
| मन | मन | mind |
| उडगन | तारों के समूह | groups of stars |
| से | जैसे | like |
| रामभगत | राम के भक्त | devotees of Rama |
| जन | जन | people |
| जीवन | जीवन का | of life |
| धन | धन | treasure |
| से | जैसे | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 55
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 54, 55
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।