बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकल बिघ्न ब्यापहि नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही।।
मूल पाठ
सकल बिघ्न ब्यापहि नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही।।
सोइ सादर सर मज्जनु करई। महा घोर त्रयताप न जरई।।
स्रोत अभिलेख 1.39 · पुस्तक पृ. 61, 63
भावार्थ
मूल पाठ के बादये सारे विघ्न उसको नहीं व्यापते (बाधा नहीं देते) जिसे श्रीरामचन्द्रजी सुन्दर कृपाकी दृष्टिसे देखते हैं। वही आदरपूर्वक इस सरोवरमें स्नान करता है और महान् भयानक त्रितापसे (आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक तापोंसे) नहीं जलता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 62 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सकल बिघ्न ब्यापहि नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही।।
English explanation
All these obstacles do not afflict the one upon whom Rama looks graciously.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| बिघ्न | बाधाएँ | obstacles |
| ब्यापहि | घेरती हैं; प्रभावित करती हैं | beset; afflict |
| नहिं | नहीं | not |
| तेही | उस व्यक्ति को | that person |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| सुकृपाँ | अपनी शुभ कृपा से | with gracious favor |
| बिलोकहिं | देखते हैं | look upon |
| जेही | जिस व्यक्ति को | whom |
2 सोइ सादर सर मज्जनु करई। महा घोर त्रयताप न जरई।।
English explanation
That person bathes reverently in the lake and is not scorched by the three exceedingly terrible afflictions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही व्यक्ति | that very person |
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| सर | सरोवर में | in the lake |
| मज्जनु | स्नान | bathing |
| करई | करता है | performs |
| महा | अत्यंत | exceedingly |
| घोर | भयंकर | terrible |
| त्रयताप | तीन प्रकार के ताप | the three kinds of affliction |
| न | नहीं | not |
| जरई | जलता है | is scorched |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 62
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 61, 63
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।