बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकइ उठाइ सरासुर मेरू। सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दबाणासुर, जो सुमेरुको भी उठा सकता था, वह भी हृदयमें हारकर परिक्रमा करके चला गया; और जिसने खेलसे ही कैलासको उठा लिया था, वह रावण भी उस सभामें पराजयको प्राप्त हुआ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 277 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सकइ उठाइ सरासुर मेरू। सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू।।
जेहि कौतुक सिवसैलु उठावा। सोउ तेहि सभाँ पराभउ पावा।।
स्रोत अभिलेख 1.292 · पुस्तक पृ. 277, 277
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सकइ उठाइ सरासुर मेरू। सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू।।
English explanation
Even one capable of lifting Mount Meru together with gods and demons conceded defeat inwardly and turned back.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकइ | सकता है | can |
| उठाइ | उठा | lift |
| सरासुर | देवताओं और असुरों सहित | together with gods and demons |
| मेरू | मेरु पर्वत | Mount Meru |
| सोउ | वह भी | even he |
| हियँ | मन में | in his heart |
| हारि | हार मानकर | conceding defeat |
| गयउ | चला गया | went away |
| करि | करके | making |
| फेरू | वापसी; लौटना | a turn back; retreat |
2 जेहि कौतुक सिवसैलु उठावा। सोउ तेहि सभाँ पराभउ पावा।।
English explanation
Even he who had playfully lifted Shiva’s mountain, Kailasa, suffered defeat in that assembly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिसने | he who |
| कौतुक | खेल-खेल में | playfully |
| सिवसैलु | शिव का पर्वत कैलास | Shiva’s mountain, Kailasa |
| उठावा | उठाया था | had lifted |
| सोउ | वह भी | even he |
| तेहि | उस | that |
| सभाँ | सभा में | in the assembly |
| पराभउ | पराजय | defeat |
| पावा | पाई | suffered; met with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.292
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 277
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 277, 277
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।