बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपरन्तु शिवजीके धनुषको कोई भी नहीं हटा सका। सारे बलवान् वीर हार गये। तीनों लोकोंमें जो वीरताके अभिमानी थे, शिवजीके धनुषने सबकी शक्ति तोड़ दी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 277 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा।।
तीनि लोक महँ जे भटमानी। सभ कै सकति संभु धनु भानी।।
स्रोत अभिलेख 1.292 · पुस्तक पृ. 277, 277
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा।।
English explanation
No one could even move Shiva’s bow; all the powerful heroes failed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभु | शिव का | Shiva’s |
| सरासनु | धनुष | bow |
| काहुँ | किसी ने | anyone |
| न | नहीं | not |
| टारा | हिलाया; अपने स्थान से हटाया | moved; displaced |
| हारे | असफल हुए | failed |
| सकल | सभी | all |
| बीर | वीर | heroes |
| बरिआरा | बलवान | powerful |
2 तीनि लोक महँ जे भटमानी। सभ कै सकति संभु धनु भानी।।
English explanation
Shiva’s bow tested the strength of all who considered themselves warriors throughout the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तीनि | तीन | three |
| लोक | लोक | worlds |
| महँ | में | in |
| जे | जो | those who |
| भटमानी | अपने को योद्धा मानने वाले | those proud of being warriors |
| सभ | सबकी | all of them |
| कै | की | of |
| सकति | शक्ति | strength |
| संभु | शिव के | Shiva’s |
| धनु | धनुष ने | bow |
| भानी | परख ली; वास्तविक सीमा दिखा दी | gauged; exposed its limits |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.292
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 277
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 277, 277
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।