बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संभुगिरा पुनि मृषा न होई। सिव सर्बग्य जान सबु कोई।।
मूल पाठ
संभुगिरा पुनि मृषा न होई। सिव सर्बग्य जान सबु कोई।।
अस संसय मन भयउ अपारा। होई न हृदयँ प्रबोध प्रचारा।।
स्रोत अभिलेख 1.51 · पुस्तक पृ. 72, 72
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर शिवजीके वचन भी झूठे नहीं हो सकते। सब कोई जानते हैं कि शिवजी सर्वज्ञ हैं। सतीके मनमें इस प्रकारका अपार सन्देह उठ खड़ा हुआ, किसी तरह भी उनके हृदयमें ज्ञानका प्रादुर्भाव नहीं होता था॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 72 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 संभुगिरा पुनि मृषा न होई। सिव सर्बग्य जान सबु कोई।।
English explanation
Yet Shiva’s words cannot be false; everyone knows that Shiva is omniscient.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभुगिरा | शंभु अर्थात शिव की वाणी | the words of Shambhu, or Shiva |
| पुनि | फिर भी | yet |
| मृषा | असत्य | false |
| न | नहीं | not |
| होई | हो सकती | can be |
| सिव | शिव | Lord Shiva |
| सर्बग्य | सब कुछ जानने वाले | omniscient |
| जान | जानता है | knows |
| सबु | हर | every |
| कोई | व्यक्ति | person |
2 अस संसय मन भयउ अपारा। होई न हृदयँ प्रबोध प्रचारा।।
English explanation
Such immense doubt arose in Sati’s mind; clear understanding did not dawn in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| संसय | संशय | doubt |
| मन | मन में | in the mind |
| भयउ | उत्पन्न हुआ | arose |
| अपारा | अपार | immense |
| होई | होता था | arose |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| प्रबोध | स्पष्ट समझ | clear understanding |
| प्रचारा | प्रकाश या प्रसार | the dawning or spread |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 72
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 72, 72
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।