बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी। सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी।।
मूल पाठ
बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी। सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी।।
खोजइ सो कि अग्य इव नारी। ग्यानधाम श्रीपति असुरारी।।
स्रोत अभिलेख 1.51 · पुस्तक पृ. 72, 72
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवताओंके हितके लिये मनुष्यशरीर धारण करनेवाले जो विष्णुभगवान् हैं, वे भी शिवजीकी ही भाँति सर्वज्ञ हैं। वे ज्ञानके भण्डार, लक्ष्मीपति और असुरोंके शत्रु भगवान् विष्णु क्या अज्ञानीकी तरह स्त्रीको खोजेंगे?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 72 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी। सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी।।
English explanation
AI-generated draft meaning: Vishnu, who assumes a human body for the gods’ welfare, is omniscient, like Shiva, the destroyer of Tripura.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिष्नु | विष्णु भगवान | Lord Vishnu |
| जो | जो | who |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| हित | हित के लिए | for the welfare |
| नरतनु | मानव शरीर | a human body |
| धारी | धारण करने वाले | one who assumes |
| सोउ | वे भी | he too |
| सर्बग्य | सब कुछ जानने वाले | omniscient |
| जथा | जैसे | like |
| त्रिपुरारी | त्रिपुर का नाश करने वाले शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
2 खोजइ सो कि अग्य इव नारी। ग्यानधाम श्रीपति असुरारी।।
English explanation
Would he—the abode of knowledge, Lakshmi’s lord and the enemy of demons—search for a woman like an ignorant person?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खोजइ | खोजते हैं | searches for |
| सो | वे | he |
| कि | क्या | would …? |
| अग्य | अज्ञानी व्यक्ति | an ignorant person |
| इव | की तरह | like |
| नारी | स्त्री को | a woman |
| ग्यानधाम | ज्ञान के धाम | the abode of knowledge |
| श्रीपति | लक्ष्मी के पति विष्णु | Vishnu, Lakshmi’s consort |
| असुरारी | असुरों के शत्रु | the enemy of demons |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 72
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 72, 72
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।