बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी। हर अंतरजामी सब जानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयद्यपि भवानीजीने प्रकट कुछ नहीं कहा, पर अन्तर्यामी शिवजी सब जान गये। वे बोले— हे सती! सुनो, तुम्हारा स्त्रीस्वभाव है। ऐसा सन्देह मनमें कभी न रखना चाहिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 72 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी। हर अंतरजामी सब जानी।।
सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.51 · पुस्तक पृ. 72, 72
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी। हर अंतरजामी सब जानी।।
English explanation
Although Bhavani did not openly express her doubt, Shiva, the knower of inner thoughts, knew it all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| प्रगट | खुलकर | openly |
| न | नहीं | not |
| कहेउ | कहा | said |
| भवानी | भवानी, यहाँ सती | Bhavani, here Sati |
| हर | शिव | Shiva |
| अंतरजामी | अंतर की बातें जानने वाले | knower of inner thoughts |
| सब | सब कुछ | everything |
| जानी | जान लिया | understood |
2 सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ।।
English explanation
Listen, Sati! This is your womanly disposition. Never harbor such doubt in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहि | सुनो | listen |
| सती | हे सती, शिव की पत्नी | O Sati, Shiva’s wife |
| तव | तुम्हारा | your |
| नारि | स्त्री का | womanly |
| सुभाऊ | स्वभाव | disposition |
| संसय | संशय | doubt |
| अस | ऐसा | such |
| न | मत | do not |
| धरिअ | रखो | harbor |
| उर | हृदय में | in the heart |
| काऊ | कभी भी | ever |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 72
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 72, 72
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।