बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संबत मध्य नास तव होऊ। जलदाता न रहिहि कुल कोऊ।।
मूल पाठ
संबत मध्य नास तव होऊ। जलदाता न रहिहि कुल कोऊ।।
नृप सुनि श्राप बिकल अति त्रासा। भै बहोरि बर गिरा अकासा।।
स्रोत अभिलेख 1.174 · पुस्तक पृ. 175, 176
भावार्थ
मूल पाठ के बादएक वर्षके भीतर तेरा नाश हो जाय, तेरे कुलमें कोई पानी देनेवालातक न रहेगा। शाप सुनकर राजा भयके मारे अत्यन्त व्याकुल हो गया। फिर सुन्दर आकाशवाणी हुई—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 176 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 संबत मध्य नास तव होऊ। जलदाता न रहिहि कुल कोऊ।।
English explanation
May you be destroyed within a year; may no one remain in your lineage even to offer water to the departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संबत | एक वर्ष के | a year |
| मध्य | भीतर | within |
| नास | विनाश | destruction |
| तव | तेरा | your |
| होऊ | हो | may occur |
| जलदाता | मृत पूर्वजों को जल देने वाला | one who offers water to deceased ancestors |
| न | नहीं | not |
| रहिहि | बचेगा | will remain |
| कुल | कुल में | in the lineage |
| कोऊ | कोई भी | anyone |
2 नृप सुनि श्राप बिकल अति त्रासा। भै बहोरि बर गिरा अकासा।।
English explanation
Hearing the curse, the king became distraught with great fear. Then a lofty voice spoke from the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा | the king |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| श्राप | शाप | the curse |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| अति | अत्यंत | extremely |
| त्रासा | भयभीत | frightened |
| भै | हुई | arose |
| बहोरि | फिर | then |
| बर | श्रेष्ठ | lofty |
| गिरा | वाणी | voice |
| अकासा | आकाश से | from the sky |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.174
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 176
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 175, 176
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।