बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संत संभु श्रीपति अपबादा। सुनिअ जहाँ तहँ असि मरजादा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजहाँ संत, शिवजी और लक्ष्मीपति विष्णुभगवान्की निन्दा सुनी जाय वहाँ ऐसी मर्यादा है कि यदि अपना वश चले तो उस (निन्दा करनेवाले) की जीभ काट ले और नहीं तो कान मूँदकर वहाँसे भाग जाय॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 83 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
संत संभु श्रीपति अपबादा। सुनिअ जहाँ तहँ असि मरजादा।।
काटिअ तासु जीभ जो बसाई। श्रवन मूदि न त चलिअ पराई।।
स्रोत अभिलेख 1.64 · पुस्तक पृ. 83, 83
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 संत संभु श्रीपति अपबादा। सुनिअ जहाँ तहँ असि मरजादा।।
English explanation
Where slander of saints, Shiva, or Vishnu, Lakshmi’s lord, is heard, this is the prescribed conduct—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संतों की | of saints |
| संभु | शंभु शिव की | of Shiva |
| श्रीपति | लक्ष्मीपति विष्णु की | of Vishnu, Lakshmi’s lord |
| अपबादा | निंदा | slander |
| सुनिअ | सुनी जाए | is heard |
| जहाँ | जहाँ | where |
| तहँ | वहाँ | there |
| असि | ऐसी | such |
| मरजादा | आचरण की मर्यादा | rule of conduct |
2 काटिअ तासु जीभ जो बसाई। श्रवन मूदि न त चलिअ पराई।।
English explanation
If one has the power, one should cut out the slanderer’s tongue; otherwise, one should close one’s ears and leave the place.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काटिअ | काट देनी चाहिए | should cut off |
| तासु | उस निंदक की | that slanderer’s |
| जीभ | जीभ | tongue |
| जो | यदि | if |
| बसाई | वश चले | it is within one’s power |
| श्रवन | कान | ears |
| मूदि | बंद करके | having closed |
| न | नहीं | not |
| त | तो | then |
| चलिअ | चले जाना चाहिए | should go |
| पराई | दूर हटकर | away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 83
- सहायक विषय
- पतिके अपमानसे दु:खी होकर सतीका योगाग्निसे जल जाना, दक्ष-यज्ञ-विध्वंस
- मुद्रित पृष्ठ
- 83, 83
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।