बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जगदातमा महेसु पुरारी। जगत जनक सब के हितकारी।।
मूल पाठ
जगदातमा महेसु पुरारी। जगत जनक सब के हितकारी।।
पिता मंदमति निंदत तेही। दच्छ सुक्र संभव यह देही।।
स्रोत अभिलेख 1.64 · पुस्तक पृ. 83, 83
भावार्थ
मूल पाठ के बादत्रिपुर दैत्यको मारनेवाले भगवान् महेश्वर सम्पूर्ण जगत्के आत्मा हैं, वे जगत्पिता और सबका हित करनेवाले हैं। मेरा मन्दबुद्धि पिता उनकी निन्दा करता है; और मेरा यह शरीर दक्षहीके वीर्यसे उत्पन्न है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 83 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जगदातमा महेसु पुरारी। जगत जनक सब के हितकारी।।
English explanation
Shiva, the great Lord and foe of Tripura, is the soul of the universe, the world’s father, and the benefactor of all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जगदातमा | जगत की आत्मा | soul of the universe |
| महेसु | महान ईश्वर शिव | Shiva, the great Lord |
| पुरारी | त्रिपुर के शत्रु शिव | Shiva, foe of Tripura |
| जगत | जगत के | of the world |
| जनक | जनक | father |
| सब | सब | all |
| के | के | of |
| हितकारी | हित करने वाले | benefactor |
2 पिता मंदमति निंदत तेही। दच्छ सुक्र संभव यह देही।।
English explanation
My foolish father slanders that very Shiva. This body arose from Daksha’s seed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पिता | मेरे पिता | my father |
| मंदमति | मंदबुद्धि | foolish |
| निंदत | निंदा करते हैं | slanders |
| तेही | उन्हीं शिव की | that very Shiva |
| दच्छ | दक्ष के | of Daksha, Sati’s father |
| सुक्र | वीर्य से | from semen |
| संभव | उत्पन्न | born |
| यह | यह | this |
| देही | देह | body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.64
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 83
- सहायक विषय
- पतिके अपमानसे दु:खी होकर सतीका योगाग्निसे जल जाना, दक्ष-यज्ञ-विध्वंस
- मुद्रित पृष्ठ
- 83, 83
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।