बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोभी लोलुप कल कीरति चहई। अकलंकता कि कामी लहई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलोभी-लालची सुन्दर कीॢत चाहे, कामी मनुष्य निष्कलंकता [चाहे तो] क्या पा सकता है? और जैसे श्रीहरिके चरणोंसे विमुख मनुष्य परमगति (मोक्ष) चाहे, हे राजाओ! सीताके लिये तुम्हारा लालच भी वैसा ही व्यर्थ है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 257 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लोभी लोलुप कल कीरति चहई। अकलंकता कि कामी लहई।।
हरि पद बिमुख परम गति चाहा। तस तुम्हार लालचु नरनाहा।।
स्रोत अभिलेख 1.267 · पुस्तक पृ. 257, 258
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लोभी लोलुप कल कीरति चहई। अकलंकता कि कामी लहई।।
English explanation
A greedy, covetous person desires fair renown; can a lustful person attain an unblemished character?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोभी | लोभ करने वाला | greedy |
| लोलुप | अत्यंत लालची; लिप्सु | covetous; grasping |
| कल | सुंदर; उज्ज्वल | fair; noble |
| कीरति | यश; प्रसिद्धि | renown; reputation |
| चहई | चाहता है | desires |
| अकलंकता | कलंकहीनता | spotlessness; freedom from blemish |
| कि | क्या | can …? |
| कामी | कामवासना में लिप्त व्यक्ति | a lustful person |
| लहई | पाता है; पा सकता है | attains; can attain |
2 हरि पद बिमुख परम गति चाहा। तस तुम्हार लालचु नरनाहा।।
English explanation
One turned away from Hari’s feet desires the highest spiritual state—such is your craving, O kings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | भगवान हरि के | of Lord Hari |
| पद | चरण | feet |
| बिमुख | विमुख; मुँह मोड़े हुए | turned away |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| गति | आध्यात्मिक अवस्था; मुक्ति | spiritual destination; liberation |
| चाहा | चाहता है | desires |
| तस | वैसा ही | just such |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
| लालचु | लालच; लोभपूर्ण चाह | craving; greedy desire |
| नरनाहा | हे राजाओ | O kings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.267
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 257
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 257, 258
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।