बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोलाहलु सुनि सीय सकानी। सखीं लवाइ गईं जहँ रानी।।
मूल पाठ
कोलाहलु सुनि सीय सकानी। सखीं लवाइ गईं जहँ रानी।।
रामु सुभायँ चले गुरु पाहीं। सिय सनेहु बरनत मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.267 · पुस्तक पृ. 257, 258
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोलाहल सुनकर सीताजी शंकित हो गयीं। तब सखियाँ उन्हें वहाँ ले गयीं जहाँ रानी (सीताजीकी माता) थीं। श्रीरामचन्द्रजी मनमें सीताजीके प्रेमका बखान करते हुए स्वाभाविक चालसे गुरुजीके पास चले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 257 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कोलाहलु सुनि सीय सकानी। सखीं लवाइ गईं जहँ रानी।।
English explanation
Hearing the uproar, Sita became frightened. Her companions took her to where the queen was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोलाहलु | शोर; हल्ला | uproar |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सीय | सीता | Sita |
| सकानी | डर गईं; सहम गईं | became frightened |
| सखीं | सखियाँ | her female companions |
| लवाइ | साथ लेकर | taking her along |
| गईं | गईं | went |
| जहँ | जहाँ | where |
| रानी | रानी; सीता की माता | the queen, Sita’s mother |
2 रामु सुभायँ चले गुरु पाहीं। सिय सनेहु बरनत मन माहीं।।
English explanation
Rama went calmly to his teacher, inwardly recounting Sita’s love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| सुभायँ | सहज भाव से | naturally; calmly |
| चले | चले; गए | went |
| गुरु | गुरु विश्वामित्र के | to his teacher Vishvamitra |
| पाहीं | पास | near; to |
| सिय | सीता का | Sita’s |
| सनेहु | प्रेम | love |
| बरनत | वर्णन करते हुए | recounting |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में; भीतर | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.267
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 257
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 257, 258
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।